दिमाग क्या है मनुष्य के दिमाग के बारे में रोचक तथ्य की जानकारी

    दिमाग क्या है  ? इंसानी दिमाग एक पावरफुल अंग है यह सभी बॉडी फंक्शन्स को कन्ट्रोल करता है और दुनिया की जानकारियों का अर्थ निकालता है. आँखों से दिखने वाली हर चीज का असर पहले दिमाग पर ही पड़ता है. दिमाग से सोचने की ताकत विकसित होती है. दिमाग के बारे में लोगों को ज्यादा जानकारी नही है

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    आईये जानते है दिमाग के बारे में खास तथ्यों के बारे में. दिमाग के बारे में लोगों के मिथक क्या है और उन मिथकों के तथ्य क्या है, क्या यह सच है या झूठ. दिमाग के बारे में रोचक तथ्यों के बारे में भी हम इस पोस्ट में जानेंगे

    मनुष्य के दिमाग के बारे में रोचक तथ्य क्या है ?

    • अगर कोई इंसान बहुत असामान्य तरीके से खाना खा रहा है इसका मतलब है की उसे किसी चीज की टेंशन है. 
    • हम जैसे गाने सुनते है उस पल हम दुनिया को उसी रूप में देखने लगते है. 
    • इंसान का दिमाग जो भी सपना सोचता है सुबह उसका 60% भूल जाता है. 
    • सोने से पहले आप जिस आदमी के बारे में सोचते है, आप उससे मिल चुके होते है और वह ही आपकी ख़ुशी और दुःख का कारण होता है. 
    • इंसान का दिमाग किसी चीज को खोने के बाद बहुत याद करता है. 
    • पुरुष का दिमाग अगर तकलीफ पहुंचे पर उसे भूल जाता है लेकिन माफ़ नहीं करता जबकि महिला का दिमाग तक्लेफ़ पहुँचने पर माफ़ कर देता है लेकिन उस बात को भूलता नहीं है. 
    • अगर कोई इंसान छोटी सी बात पर रो देता है या इमोशनल हो जाता है तो इसका मतलब है की वो दिमाग और दिल से नर्म स्वभाव का है. 
    • आपका दिमाग बोरिंग बातों को भी मजेदार बना सकता है. 
    • आपके दिमाग हर सवाल का ऑन द स्पॉट जवाब भी तैयार कर सकता है. 
    • आपका दिमाग उलटे और सीधे दोनों तरह के ख्यालों को जगह देता है. जैसा आप सोचते है वैसा ही हो जाता है. 
    • गुस्से में हमारा दिमाग ज्यादा गर्म होता है और ना करने वाली चीज भी कर देता है

    मनुष्य के दिमाग की जानकारी ?

    मिथक हम अपने दिमाग का सिर्फ 10 फिसदी काम मे लेते है ?
    तथ्य - यह दिमाग के बारे में सबसे ज्यादा मशहुर मिथक है. इसे हार्वर्ड के मनोवैज्ञानिकों विलियम जेम्स और बोरिस सिडिस की रिजर्व एनर्जी थ्योरी द्वारा खोजा गया था. 1890 में जेम्स ने बताया कि लोग अपनी मानसिक शक्ति का केवल कुछ अंश इस्तेमाल करते है. कइयों को विश्वास है कि हम नई भाषा, संगीत वाद्ययंत्र या किसी खेल को सीखकर ज्यादा प्राप्त कर सकते है. यह मिथक आकर्षक है, क्योंकि यह मानवीय क्षमताओं की बात करता है.
     
    मिथक क्रॉसवर्ड पजल्स मेमोरी बढाते है
    तथ्य- अल्बर्ट आइंस्टीन कॉलेज ऑफ मेडिसिन, न्यूयॉर्क के शोधकर्ताओं के एक अध्ययन के मुताबिक क्रॉसवर्ड पजल्स हल करने से 75 से 85 की उम्र के बीच के लोगों की मेमोरी में कमी थोड़ी दूर जाती है, लेकिन डिमेंशिया के लक्षण होने पर इस गिरावट में तेजी देखी गई. न्यूरोसाइंटिस्ट्स का मानना है कि क्रॉसवर्ड पजल्स हल करने से कोई दिक्कत नही होती, इससे आप सिर्फ पहेलिया सुलझाने में एक्सपर्ट बनते है. 

    मिथक सिरदर्द दिमाग में होता है
    तथ्य- माना जाता है कि सिरदर्द टेंशन और दिमाग की नसो में सुजन के कारण होता है. लेकिन दिमाग में खुद का कोई दर्द का रिसेप्टर नही होता है. हालांकि मेनिंगज (दिमाग के चारो ओर की कवरिंग), पेरिओस्टेम (बोन्स की कवरिंग) और खोपड़ी में दर्द के रिसेप्टर होते है. दरअसल सिरदर्द सिर और गर्दन की मांसपेशियो के टाइट होने के कारण होता है

    मिथक ब्रेन डैमेज स्थाई होता है
    तथ्य दिमाग कुछ निश्चित लॉसेज के लिए रिपेयर या क्षतिपुर्ति कर सकता है. यह नई सेल भी जनरेट कर सकता है. वैज्ञानिक मानते थे कि दिमाग में बदलाव नही किया जा सकता है. एक बार इसमें किसी तरह की खराबी आ जाए तो इसे फिक्स नही किया जा सकता. हालांकि यह भी नोट किया जाना चाहिए कि दिमाग ताउम्र प्लास्टिक की तरह रहता है. यह सीखने के लिए खुद को रिवायर कर सकता है

    मिथक कोमा में जाना सोने की तरह है आप पुरा आराम करके उठते है
    तथ्य - फिल्मों में कोमा हानि रहित दिखता है. असल जिंदगी मे कोमा से बाहर आने के बाद किसी तरह की अक्षमता आ जाती है और पुनर्वास की जरूरत होती है. फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च के वेज्ञानिकों ने 2012 में पाया कि नींद के दौरान भी दिमाग के ज्यादा काम में आने वाले क्षैत्रो में गतिविधियां होती है. कोमा के मरीजो में यह क्षेत्र अंधेरे में होता है और दुसरे क्षैत्रो मे अपर्याप्त प्रकाश होता है

    मिथक पुरूष का दिमाग गणित और महिला का दिमाग सहानुभूति के लिए बना है. 
    तथ्य- पुरूषों और महिलाओ के दिमाग में कुछ एटोनॉमिकल अंतर होता है. मेमोरी के लिए जिम्मेदारी हिप्पोकैंपस आमतौर पर महिलाओ में बड़ा होता है, जबकि प्रमस्तिष्क खंड जो भावनाओं के लिए जिम्मेदार होता है, वह पुरूषों में बड़ा होता है. यह मिथक के बिल्कूल उलट है. कई अहम सबुतो से पता लगता है कि लैंगिक असामनता सांस्कृतिक अपेक्षाओं के कारण होती है, न कि बायोलॉजी के कारण

    मिथक किसी इंसान की पर्सनेलिटी बताती है कि कौन ज्यादा प्रभावी है- दायां दिमाग या बायां दिमाग
    तथ्य- दिमाग के दोनो हिस्से जटिल रूप से एक-दूसरे पर निर्भर होते है. हम अक्सर सुनते है कि एक व्यक्ति में दिमाग का दायां हिस्सा या बायां हिस्सा ज्यादा प्रभावी होता है. जो मानते है कि दायां हिस्सा ज्यादा प्रभावी है, वे खुद को ज्यादा क्रिएटिव या कलात्मक मानते है. बायां दिमाग ज्यादा प्रभावी मानने वाले खुद को ज्यादा टेक्नीकल या लॉजिकल मानते है. लेकिन बै्रन स्केनिंग टेक्नोलॉजी से पता लगा है कि जटिल प्रोसेसिंग में ज्यादातर दिमाग के दोनों हिस्से एक साथ काम करते है. पहले माना जाता था कि लैंग्वेज प्रोसेसिंग बाएं दिमाग के कारण होती है. सच्चाई यह है कि दोनों हिस्से मिलकर यह काम पूरा करते है. बायां हिस्सा व्याकरण और उच्चारण की प्रक्रिया पर काम करता है, जबकि दायां हिस्सा आवाज के उतार-चढ़ाव पर काम करता है.